Bandhak deed cancel/release karne ka format aur process

बंधक विलेख (Mortgage Deed) को कैंसिल या रिलीज (Release) करने के लिए लेनदार (Lender) द्वारा एक ‘Release Deed’ या ‘Reconveyance Deed’ तैयार किया जाता है। इसमें यह घोषित किया जाता है कि लोन चुक गया है, और इसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराकर बंधक खत्म किया जाता है।

लोन का पूरा पैसा चुकाने के बाद सिर्फ बैंक से एक नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट (NOC) ले लेना काफी नहीं है। प्रॉपर्टी को कानूनी रूप से मुक्त (Free) कराने के लिए एक औपचारिक दस्तावेज़ रजिस्ट्रार में दर्ज कराना पड़ता है।

बंधक रिलीज़ (Release Deed) का Step-by-Step Process

Step 1: NOC और मूल कागज़ात प्राप्त करें लोन चुकाने के बाद, लेनदार (बैंक) से बंधक मुक्तिकरण (Mortgage Redemption) का प्रमाण पत्र और प्रॉपर्टी के मूल कागज़ वापस लें।

Step 2: Release Deed का ड्राफ्ट तैयार करना एक वकील की मदद से ‘Release Deed’ का ड्राफ्ट तैयार करें। इसमें लेनदार की ओर से यह घोषणा होगी कि “मैं अपना सारा बकाया प्राप्त कर लिया है और प्रॉपर्टी पर से अपना बंधक अधिकार छोड़ता/छोड़ती हूँ।”

Step 3: स्टांप ड्यूटी का भुगतान छत्तीसगढ़ के नियमों के अनुसार Release Deed पर स्टांप ड्यूटी खरीदें। आमतौर पर बैंक इस स्टांप ड्यूटी का खर्च उठाता है, लेकिन कभी-कभी यह कर्ज़दार को देना पड़ता है।

Step 4: सब-रजिस्ट्रार में रजिस्ट्री कर्ज़दार और लेनदार के प्रतिनिधि (बैंक अधिकारी) दोनों को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाना होगा। बंधक डीड रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों की तरह ही इसमें भी पहचान पत्र और फोटो लगेंगे।

Step 5: EC (Encumbrance Certificate) अपडेट रजिस्ट्री के बाद, तहसील/रजिस्ट्रार रिकॉर्ड में आपकी प्रॉपर्टी के सामने से बंधक (Mortgage) की एंट्री हट जाएगी। अब प्रॉपर्टी खरीदते समय Encumbrance Certificate में प्रॉपर्टी बिल्कुल साफ़ दिखेगी।

एक वास्तविक उदाहरण

दुर्ग के एक व्यक्ति ने अपना होम लोन बंद कर दिया। बैंक ने उसे एक सादे कागज़ पर NOC दे दी। उसने Release Deed रजिस्टर नहीं करायी। 3 साल बाद जब उसने अपनी प्रॉपर्टी बेचनी चाही, तो खरीददार ने EC निकाली। EC में बैंक का बंधक अभी भी दर्ज था। उस व्यक्ति को तब तक इंतज़ार करना पड़ा जब तक कि वह बैंक के वकीलों को लेकर जाकर Release Deed की रजिस्ट्री नहीं करवाई। लोन चुकाने के बाद रसीदें और दस्तावेज़ कितने दिन रखने चाहिए, यह भी जानना ज़रूरी है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: Release Deed के लिए कौन-सा फॉर्मेट होता है? A1: इसका फॉर्मेट एक वकील द्वारा तैयार किया जाता है जिसमें लोन खाता संख्या (Loan Account Number), मूल बंधक विलेख की रजिस्ट्री संख्या और संपत्ति का विवरण होता है।

Q2: क्या बिना बैंक के जाए मैं अकेला Release Deed रजिस्टर कर सकता हूँ? A2: नहीं, Release Deed पर बैंक के अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर और उपस्थिति अनिवार्य हैं।

Q3: अगर बैंक Release Deed बनाने में देरी करे तो क्या करें? A3: आप बैंक के नोडल अधिकारी (Nodal Officer) या बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) से शिकायत कर सकते हैं।


संबंधित लेख:

सभी बंधक और लोन लेखों के लिए: बंधक और लोन दस्तावेज़

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

Similar Posts

  • Bandhak vilekh vs equitable mortgage — CG mein kaunsa common hai

    बंधक विलेख (Registered Mortgage Deed) और Equitable Mortgage (समानुपातिक बंधक) में मुख्य फर्क यह है कि बंधक विलेख को सब-रजिस्ट्रार में रजिस्टर कराना पड़ता है, जबकि Equitable Mortgage में सिर्फ प्रॉपर्टी के मूल कागज़ (Title Deeds) बैंक को जमा कर दिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में बैंकों के मामलों में Equitable Mortgage ज़्यादा common (आम) है।…

  • Property bandhak rakhne se pehle valuation kaise karayein

    प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखने से पहले वैल्यूएशन (Valuation) कराने के लिए आपको बैंक या लेनदार द्वारा मंज़ूर किए गए किसी सरकारी-पंजीकृत वैल्यूएटर (Valuator) को बुलाना पड़ता है। वह प्रॉपर्टी की वर्तमान स्थिति, लोकेशन और सर्किल रेट (Circle Rate) के आधार पर उसका बाज़ार मूल्य (Market Value) तय करता है, जिससे तय होता है कि आपको…

  • Bandhak deed mein interest rate clause kaise likha jaata hai

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) में Interest Rate (ब्याज दर) क्लॉज इस तरह लिखा जाता है कि उसमें वार्षिक ब्याज दर, ब्याज की गणना का तरीका (simple या compound), भुगतान की आवृत्ति (मासिक/वार्षिक), और अगर किस्त समय पर न चुकाई जाए तो लगने वाले जुर्माने (penalty) का स्पष्ट उल्लेख हो। बंधक विलेख में ब्याज दर का…

  • Bandhak Vilekh kya hota hai — simple explanation

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी को सुरक्षा (security) के रूप में गिरवी रखकर बैंक या किसी व्यक्ति से लोन (कर्ज़) लेता है। इस दस्तावेज़ में यह तय होता है कि जब तक लोन का पूरा पैसा नहीं चुका जाता, तब तक प्रॉपर्टी को बेचा या ट्रांसफर नहीं…

  • Bandhak ki rakam se zyada property bik gayi toh baaki paisa kiska

    अगर बंधक (Mortgage) ग्रहित प्रॉपर्टी की नीलामी (Auction) में वह लोन की राशि से ज़्यादा कीमत पर बिक जाती है, तो बाकी बची हुई राशि (Surplus) मूल कर्ज़दार (Borrower) को वापस मिलती है। लेनदार (Lender) को सिर्फ अपना बकाया लोन और ब्याज रखने का अधिकार होता है, बची हुई पूरी राशि उसे नहीं रखनी पड़ती।…

  • Second mortgage (same property do baar bandhak) legal hai kya

    हां, एक ही प्रॉपर्टी पर दोबारा बंधक (Second Mortgage) लगाना कानूनी रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए पहले लेनदार (First Lender) की लिखित अनुमति (NOC) चाहिए होती है और प्रॉपर्टी की कुछ खाली वैल्यू (Equity) बची होनी चाहिए। बिना NOC के दूसरा बंधक कानूनी रूप से अमान्य (Invalid) है। अक्सर लोग एक बैंक से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *