Bandhak deed registration ke liye kaun se documents chahiye

बंधक विलेख (Mortgage Deed) की रजिस्ट्री के लिए मुख्य दस्तावेज़ों में प्रॉपर्टी की मूल सेल डीड (Title Deed), खतियान/पट्टा, पार्टियों (कर्ज़दार और लेनदार) के पैन और आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज़ फोटो, और बैंक का लोन सैंक्शन लेटर शामिल हैं। इन्हें सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा करना होता है।

प्रॉपर्टी बंधक रखकर लोन लेने का प्रोसेस पूरा करने के लिए बंधक विलेख की रजिस्ट्री सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसके लिए आपको कई तरह के दस्तावेज़ तैयार रखने पड़ते हैं, ताकि रजिस्ट्रार बिना किसी रुकावट के दस्तावेज़ दर्ज कर सके।

बंधक विलेख रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी Documents

1. प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज़ (Property Documents):

2. पार्टियों के दस्तावेज़ (KYC Documents):

  • कर्ज़दार (Borrower) और लेनदार (Lender) दोनों के पैन (PAN) कार्ड
  • आधार कार्ड (पहचान और पते के प्रमाण के रूप में)
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

3. लोन से जुड़े दस्तावेज़ (Loan Documents):

  • बैंक या वित्तीय संस्थान का लोन सैंक्शन लेटर (Sanction Letter)
  • बंधक विलेख (Mortgage Deed) का विस्तृत ड्राफ्ट (जो वकील द्वारा तैयार किया गया हो)
  • बंधक डीड में इंटरेस्ट रेट क्लॉज की जानकारी

4. स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty):

एक वास्तविक उदाहरण

दुर्ग के एक व्यक्ति ने निजी लेनदार से पैसे लेकर बंधक विलेख बनाया। वे रजिस्ट्री के लिए गए, लेकिन उनके पास प्रॉपर्टी की मूल सेल डीड नहीं थी, सिर्फ एक फोटोकॉपी थी। रजिस्ट्रार ने दस्तावेज़ दर्ज करने से मना कर दिया। उन्हें पहले नगर पालिका से प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड की पुष्टि करवानी पड़ी और फिर मूल कागज़ लेकर जाना पड़ा। इसी तरह, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के समय ज़रूरी दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट का पालन करना ज़रूरी है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या बंधक विलेख की रजिस्ट्री के लिए गवाहों (Witnesses) की ज़रूरत होती है? A1: हां, दस्तावेज़ पर कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं। बंधक विलेख में गवाहों का रोल क्या होता है, यहाँ पढ़ें।

Q2: क्या बिना मूल सेल डीड के बंधक विलेख रजिस्टर हो सकता है? A2: नहीं, रजिस्ट्रार मूल टाइटल डीड (Original Title Deed) देखकर ही बंधक दर्ज करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रॉपर्टी असली है।

Q3: बंधक विलेख रजिस्टर करने में कितना समय लगता है? A3: अगर सभी दस्तावेज़ सही हैं और स्टांप ड्यूटी पहले से चुकी हुई है, तो रजिस्ट्री एक ही दिन में पूरी हो जाती है।


संबंधित लेख:

सभी बंधक और लोन लेखों के लिए: बंधक और लोन दस्तावेज़

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

Similar Posts

  • Property bandhak rakhte waqt stamp duty kitni lagti hai CG mein

    छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखते समय स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) आमतौर पर लोन की कुल राशि या प्रॉपर्टी की वैल्यू (जो भी कम हो) का एक निर्धारित प्रतिशत लगती है। यह दर सेल डीड (Sale Deed) की स्टांप ड्यूटी से अलग और अक्सर कम होती है। बंधक विलेख (Mortgage Deed) को कानूनी रूप देने…

  • Bandhak vilekh mein witnesses ka role kya hota hai

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) में गवाहों (Witnesses) का रोल यह प्रमाणित करना होता है कि कर्ज़दार (Borrower) और लेनदार (Lender) ने दस्तावेज़ पर अपनी मर्जी से, बिना किसी दबाव या धोखे के हस्ताक्षर किए हैं। Registration Act, 1908 के अनुसार, बंधक विलेख पर कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। किसी भी…

  • Loan chukane ke baad receipt/documents kitne din rakhne chahiye

    लोन चुकाने के बाद रसीदें और दस्तावेज़ (NOC, Closure Letter, Release Deed) कम से कम तब तक रखने चाहिए जब तक आप उस प्रॉपर्टी के मालिक हैं या उसे बेच नहीं देते। बेहतर होगा कि इन्हें स्थायी (Permanent) रूप से सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के बंधक (Mortgage) विवाद से बचा…

  • Bandhak deed mein successor/heir clause kyun important hai

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) में Successor/Heir (वारिस) क्लॉज इसलिए ज़रूरी है ताकि कर्ज़दार (Borrower) की मृत्यु होने पर लोन की ज़िम्मेदारी और प्रॉपर्टी का बंधक कानूनी रूप से उसके वारिसों (Heirs) पर चला जाए। इस क्लॉज के बिना, लेनदार (Lender) को अपना पैसा वसूलने में कानूनी दिक्कतें आती हैं और परिवार में विवाद हो सकते…

  • Bandhak dispute mein Cooperative Court/Civil Court kahan jaana hai

    बंधक (Mortgage) विवाद की स्थिति में कोर्ट जाने का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि लेनदार (Lender) कौन है। अगर लेनदार कोई बैंक या निजी व्यक्ति है, तो सिविल कोर्ट (Civil Court) या DRT (Debt Recovery Tribunal) जाना पड़ता है। लेकिन अगर लोन किसी सहकारी समिति (Cooperative Society) ने दिया था, तो सहकारी…

  • Bandhak ki rakam se zyada property bik gayi toh baaki paisa kiska

    अगर बंधक (Mortgage) ग्रहित प्रॉपर्टी की नीलामी (Auction) में वह लोन की राशि से ज़्यादा कीमत पर बिक जाती है, तो बाकी बची हुई राशि (Surplus) मूल कर्ज़दार (Borrower) को वापस मिलती है। लेनदार (Lender) को सिर्फ अपना बकाया लोन और ब्याज रखने का अधिकार होता है, बची हुई पूरी राशि उसे नहीं रखनी पड़ती।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *