Property bandhak rakhne se pehle valuation kaise karayein

प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखने से पहले वैल्यूएशन (Valuation) कराने के लिए आपको बैंक या लेनदार द्वारा मंज़ूर किए गए किसी सरकारी-पंजीकृत वैल्यूएटर (Valuator) को बुलाना पड़ता है। वह प्रॉपर्टी की वर्तमान स्थिति, लोकेशन और सर्किल रेट (Circle Rate) के आधार पर उसका बाज़ार मूल्य (Market Value) तय करता है, जिससे तय होता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है।

लोन लेने के लिए सिर्फ प्रॉपर्टी के कागज़ देना काफी नहीं है। लेनदार (बैंक) को यह पक्का करना होता है कि अगर आप लोन नहीं चुकाते, तो प्रॉपर्टी बिकने पर उसका पैसा उठ सके। इसीलिए प्रॉपर्टी बंधक का पूरा प्रोसेस शुरू होने से पहले वैल्यूएशन सबसे ज़रूरी चरण है।

वैल्यूएशन (Valuation) कैसे होता है?

1. बैंक का वैल्यूएटर (Bank’s Valuer): बैंक आपको खुद वैल्यूएशन कराने नहीं कहेगा, बल्कि उसके पैनल (Panel) पर जो लाइसेंस्ड वैल्यूएटर होते हैं, उनमें से किसी एक को भेजेगा। आपको वैल्यूएटर की फीस देनी पड़ती है।

2. जाँच के मापदंड (Valuation Parameters): वैल्यूएटर यह देखता है:

  • प्रॉपर्टी का लोकेशन और आस-पास की दरें।
  • घर या फ्लैट की उम्र और बिल्डिंग की हालत (Construction quality)।
  • नक्शे के अनुसार निर्माण हुआ है या अनधिकृत निर्माण भी हुआ है।
  • सरकार द्वारा तय की गई सर्किल रेट (Circle Rate)।

3. वैल्यूएशन रिपोर्ट और लोन की राशि: बैंक आमतौर पर वैल्यूएशन रिपोर्ट की वैल्यू का 70% से 80% तक ही लोन देता है (LTV – Loan to Value ratio)। जैसे, अगर वैल्यूएटर ने ₹50 लाख की वैल्यू बताई, तो आपको ज़्यादा से ज़्यादा ₹35-40 लाख का लोन मिलेगा।

एक वास्तविक उदाहरण

भिलाई के एक व्यक्ति ने अपने पुराने घर पर ₹30 लाख का लोन मांगा। उसने सोचा था कि उसके घर की कीमत ₹40 लाख है। जब बैंक का वैल्यूएटर आया, तो उसने घर की खराब हालत और पुराने निर्माण को देखते हुए उसकी वैल्यू ₹25 लाख बता दी। बैंक ने ₹25 लाख का 75% मानकर सिर्फ ₹18 लाख का ही लोन सैंक्शन किया। उस व्यक्ति को पैसों का इंतज़ाम फिर से करना पड़ा। सेकंड-हैंड प्रॉपर्टी खरीदते समय एक्स्ट्रा सावधानी और वैल्यूएशन दोनों ज़रूरी हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या मैं खुद किसी प्राइवेट वैल्यूएटर से रिपोर्ट बनवाकर बैंक दे सकता हूँ? A1: नहीं, बैंक केवल अपने पैनल (Panel) पर मौजूद लाइसेंस्ड वैल्यूएटर की रिपोर्ट ही मान्यता देते हैं।

Q2: वैल्यूएशन की फीस कितनी होती है? A2: यह प्रॉपर्टी की वैल्यू पर निर्भर करती है, आमतौर पर यह ₹2,000 से ₹5,000 तक हो सकती है। यह फीस कर्ज़दार (Borrower) को देनी पड़ती है।

Q3: अगर मुझे वैल्यूएशन कम लगे तो क्या अपील कर सकता हूँ? A3: हां, आप बैंक से दूसरे वैल्यूएटर से वैल्यूएशन कराने की अपील कर सकते हैं, लेकिन उसका खर्च आपको ही देना होगा। बंधक पर स्टांप ड्यूटी कितनी लगती है, यह भी वैल्यूएशन पर निर्भर करती है।


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यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

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