Mortgage deed vs sale deed — kya farak hai legally
बंधक विलेख (Mortgage Deed) और सेल डीड (Sale Deed) में मुख्य कानूनी फर्क यह है कि बंधक में प्रॉपर्टी को सिर्फ लोन की सुरक्षा (Security) के लिए गिरवी रखा जाता है और मालिकाना हक (Ownership) कर्ज़दार के पास ही रहता है, जबकि सेल डीड में प्रॉपर्टी का मालिकाना हक हमेशा के लिए खरीददार के नाम हो जाता है।
अक्सर लोग इन दोनों दस्तावेज़ों के बीच का कानूनी अंतर नहीं समझ पाते और गलत दस्तावेज़ बनवा बैठते हैं। दोनों का उद्देश्य और कानूनी परिणाम बिल्कुल अलग हैं।
बंधक विलेख और सेल डीड में मुख्य अंतर
1. मालिकाना हक (Ownership Rights):
- Mortgage Deed: कर्ज़दार (Borrower) प्रॉपर्टी का मालिक बना रहता है। लेनदार को सिर्फ अधिकार मिलते हैं कि वह अपना पैसा न मिलने पर प्रॉपर्टी को बेच सके।
- Sale Deed: बिक्रेता (Seller) प्रॉपर्टी से पूरी तरह बाहर हो जाता है और खरीददार (Buyer) का नाम रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है।
2. पॉसेशन (कब्ज़ा):
- Mortgage Deed: आमतौर पर प्रॉपर्टी पर कर्ज़दार का ही कब्ज़ा (Possession) बना रहता है (अगर Equitable Mortgage न हो)।
- Sale Deed: प्रॉपर्टी का कब्ज़ा तुरंत या तय समय पर खरीददार को मिल जाता है।
3. उद्देश्य (Purpose):
- Mortgage Deed: इसका मकसद कर्ज़ (Loan) लेना है। बंधक विलेख क्या होता है, यहाँ देखें।
- Sale Deed: इसका मकसद प्रॉपर्टी को पैसों के बदले खरीदना-बेचना है।
4. दस्तावेज़ की वापसी:
- Mortgage Deed: लोन चुकाने के बाद बंधक मुक्तिकरण (Redemption) कराकर प्रॉपर्टी वापस अपनी हो जाती है।
- Sale Deed: यह एक बार होने वाला लेन-देन है। इसे वापस नहीं लिया जा सकता।
बंधक और बंधक विलेख (Equitable vs Registered) का भ्रम
लोग बंधक विलेख और Equitable Mortgage में फर्क भी नहीं समझते। Equitable Mortgage में सिर्फ कागज़ बैंक में जमा होते हैं, जबकि Registered Mortgage Deed में एक औपचारिक रजिस्टर्ड दस्तावेज़ बनता है।
एक वास्तविक उदाहरण
दुर्ग के एक व्यक्ति को ₹10 लाख चाहिए थे। उसने एक दलाल के कहने पर अपने घर की रजिस्ट्री कर दी (Sale Deed) और सोचा कि वह लेनदार से पैसे ले रहा है (Mortgage)। उसने एक अलग सादे कागज़ पर लिखा था कि “पैसा लौटाने पर घर वापस होगा”। लेनदार ने पैसा लौटाने से इनकार कर दिया और कहा कि रजिस्ट्री (Sale Deed) उसके नाम हो चुकी है, इसलिए घर उसका है। कोर्ट में व्यक्ति को काफी संघर्ष करना पड़ा यह साबित करने के लिए कि वह एक बंधक था, सेल नहीं।
(ध्यान दें: सेल एग्रीमेंट और सेल डीड में भी कानूनी फर्क होता है, जिसे समझना प्रॉपर्टी डील के लिए ज़रूरी है।)
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: क्या एक ही दस्तावेज़ में सेल और बंधक दोनों हो सकते हैं? A1: नहीं, दोनों का कानूनी उद्देश्य अलग है। अगर कोई कहता है कि “पैसा न देने पर प्रॉपर्टी तुम्हारी”, तो यह Conditional Sale कहलाएगी, न कि साधारण बंधक।
Q2: स्टांप ड्यूटी किसमें ज़्यादा लगती है? A2: सेल डीड (Sale Deed) में स्टांप ड्यूटी बहुत ज़्यादा लगती है, जबकि बंधक पर स्टांप ड्यूटी आमतौर पर लोन की राशि का एक निश्चित प्रतिशत होती है।
Q3: क्या बंधक विलेख वाली प्रॉपर्टी खरीदी जा सकती है? A3: हां, लेकिन खरीददार को पहले लेनदार का लोन चुकाकर प्रॉपर्टी को मुक्त (Redeem) कराना होगा, उसके बाद ही सेल डीड होगी।
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यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]