Bandhak Mortgage

  • Bandhak dispute mein Cooperative Court/Civil Court kahan jaana hai

    बंधक (Mortgage) विवाद की स्थिति में कोर्ट जाने का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि लेनदार (Lender) कौन है। अगर लेनदार कोई बैंक या निजी व्यक्ति है, तो सिविल कोर्ट (Civil Court) या DRT (Debt Recovery Tribunal) जाना पड़ता है। लेकिन अगर लोन किसी सहकारी समिति (Cooperative Society) ने दिया था, तो सहकारी…

  • Property bandhak rakhne se pehle valuation kaise karayein

    प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखने से पहले वैल्यूएशन (Valuation) कराने के लिए आपको बैंक या लेनदार द्वारा मंज़ूर किए गए किसी सरकारी-पंजीकृत वैल्यूएटर (Valuator) को बुलाना पड़ता है। वह प्रॉपर्टी की वर्तमान स्थिति, लोकेशन और सर्किल रेट (Circle Rate) के आधार पर उसका बाज़ार मूल्य (Market Value) तय करता है, जिससे तय होता है कि आपको…

  • Bandhak vilekh vs equitable mortgage — CG mein kaunsa common hai

    बंधक विलेख (Registered Mortgage Deed) और Equitable Mortgage (समानुपातिक बंधक) में मुख्य फर्क यह है कि बंधक विलेख को सब-रजिस्ट्रार में रजिस्टर कराना पड़ता है, जबकि Equitable Mortgage में सिर्फ प्रॉपर्टी के मूल कागज़ (Title Deeds) बैंक को जमा कर दिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में बैंकों के मामलों में Equitable Mortgage ज़्यादा common (आम) है।…

  • Loan chukane ke baad receipt/documents kitne din rakhne chahiye

    लोन चुकाने के बाद रसीदें और दस्तावेज़ (NOC, Closure Letter, Release Deed) कम से कम तब तक रखने चाहिए जब तक आप उस प्रॉपर्टी के मालिक हैं या उसे बेच नहीं देते। बेहतर होगा कि इन्हें स्थायी (Permanent) रूप से सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के बंधक (Mortgage) विवाद से बचा…

  • Bandhak grahita ki death ho jaye toh kya hota hai deed ka

    अगर बंधक ग्रहित (Mortgagor/कर्ज़दार) की डेथ हो जाती है, तो बंधक विलेख (Mortgage Deed) खत्म नहीं होता। लोन की ज़िम्मेदारी और प्रॉपर्टी दोनों कानूनी रूप से उसके वारिसों (Legal Heirs) को चली जाती है। वारिसों को या तो लोन चुकाकर प्रॉपर्टी को मुक्त (Redeem) करना होता है या फिर लेनदार प्रॉपर्टी को नीलाम कर अपना…

  • Second mortgage (same property do baar bandhak) legal hai kya

    हां, एक ही प्रॉपर्टी पर दोबारा बंधक (Second Mortgage) लगाना कानूनी रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए पहले लेनदार (First Lender) की लिखित अनुमति (NOC) चाहिए होती है और प्रॉपर्टी की कुछ खाली वैल्यू (Equity) बची होनी चाहिए। बिना NOC के दूसरा बंधक कानूनी रूप से अमान्य (Invalid) है। अक्सर लोग एक बैंक से…

  • Bandhak deed mein successor/heir clause kyun important hai

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) में Successor/Heir (वारिस) क्लॉज इसलिए ज़रूरी है ताकि कर्ज़दार (Borrower) की मृत्यु होने पर लोन की ज़िम्मेदारी और प्रॉपर्टी का बंधक कानूनी रूप से उसके वारिसों (Heirs) पर चला जाए। इस क्लॉज के बिना, लेनदार (Lender) को अपना पैसा वसूलने में कानूनी दिक्कतें आती हैं और परिवार में विवाद हो सकते…

  • Property bandhak rakhte waqt stamp duty kitni lagti hai CG mein

    छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखते समय स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) आमतौर पर लोन की कुल राशि या प्रॉपर्टी की वैल्यू (जो भी कम हो) का एक निर्धारित प्रतिशत लगती है। यह दर सेल डीड (Sale Deed) की स्टांप ड्यूटी से अलग और अक्सर कम होती है। बंधक विलेख (Mortgage Deed) को कानूनी रूप देने…

  • Informal loan (bina bandhak) vs registered mortgage — risk comparison

    अनौपचारिक लोन (Informal Loan) में सिर्फ सादे कागज़ पर गिरवी रखने का ज़िक्र होता है, जिसमें धोखाधड़ी और विवाद का खतरा बहुत ज़्यादा होता है। वहीं, Registered Mortgage (रजिस्टर्ड बंधक) में सब-रजिस्ट्रार में कानूनी दस्तावेज़ दर्ज होता है, जिससे लेनदार और कर्ज़दार दोनों के अधिकार कानूनी रूप से सुरक्षित रहते हैं। जब जल्दी पैसे चाहिए…

  • Bandhak deed cancel/release karne ka format aur process

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) को कैंसिल या रिलीज (Release) करने के लिए लेनदार (Lender) द्वारा एक ‘Release Deed’ या ‘Reconveyance Deed’ तैयार किया जाता है। इसमें यह घोषित किया जाता है कि लोन चुक गया है, और इसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराकर बंधक खत्म किया जाता है। लोन का पूरा पैसा चुकाने के बाद…