Bandhak dispute mein Cooperative Court/Civil Court kahan jaana hai

बंधक (Mortgage) विवाद की स्थिति में कोर्ट जाने का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि लेनदार (Lender) कौन है। अगर लेनदार कोई बैंक या निजी व्यक्ति है, तो सिविल कोर्ट (Civil Court) या DRT (Debt Recovery Tribunal) जाना पड़ता है। लेकिन अगर लोन किसी सहकारी समिति (Cooperative Society) ने दिया था, तो सहकारी न्यायालय (Cooperative Court) जाना पड़ता है।

जब मॉर्गेज डिफ़ॉल्ट होने पर लेनदार के राइट्स या प्रॉपर्टी की नीलामी को लेकर विवाद होता है, तो सही कोर्ट का चुनाव बहुत ज़रूरी है। गलत कोर्ट में अपील करने पर आपका केस खारिज हो सकता है और समय बर्बाद होगा।

किस विवाद में कौन सा कोर्ट?

1. सिविल कोर्ट (Civil Court): अगर आपने किसी निजी व्यक्ति (Private Lender) से अनौपचारिक लोन या रजिस्टर्ड बंधक रखकर पैसे लिए हैं और उसके साथ विवाद है (जैसे लेनदार ज़्यादा ब्याज मांग रहा हो या गलत तरीके से प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर रहा हो), तो आपको सिविल जज की कोर्ट में केस करना होगा।

2. DRT (Debt Recovery Tribunal): अगर लेनदार कोई बैंक या वित्तीय संस्थान है और लोन की राशि ₹20 लाख से ज़्यादा है, तो विवाद DRT में जाता है। बैंक SARFAESI Act के तहत प्रॉपर्टी नीलाम करने से पहले DRT से ही आदेश लेता है।

3. सहकारी न्यायालय (Cooperative Court): अगर आपने किसी सहकारी बैंक या क्रेडिट सोसाइटी से लोन लिया है और बंधक (Mortgage) रखा है, तो विवाद होने पर सहकारी न्यायालय (Cooperative Court) जाना पड़ता है। यह सिविल कोर्ट से तेज़ और सस्ता माना जाता है।

एक वास्तविक उदाहरण

दुर्ग के एक व्यक्ति ने एक सहकारी समिति से अपनी ज़मीन बंधक रखकर लोन लिया। वह कुछ किस्तें नहीं दे पाया। समिति ने बिना नोटिस दिए उसकी ज़मीन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी। व्यक्ति ने सीधे सिविल कोर्ट में केस कर दिया। सिविल कोर्ट ने कहा कि चूंकि लोन सहकारी समिति से लिया गया था, इसलिए यह मामला सिविल कोर्ट में नहीं, बल्कि सहकारी न्यायालय (Cooperative Court) में जाएगा। उस व्यक्ति को पैसे और समय दोनों बर्बाद करने पड़े। पारिवारिक संपत्ति बंटवारे के विवाद में भी सही कोर्ट का चुनाव इसी तरह ज़रूरी है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या बंधक विवाद में पुलिस मदद कर सकती है? A1: नहीं, प्रॉपर्टी और बंधक का विवाद सिविल (दीवानी) प्रकृति का होता है। पुलिस केवल तब दखल देती है जब कोई आपराधिक धोखाधड़ी (Fraud) या ज़बरदस्ती कब्ज़ा हो।

Q2: क्या मैं सेकंड मॉर्गेज (Second Mortgage) को रोकने के लिए कोर्ट जा सकता हूँ? A2: हां, अगर किसी ने बिना आपकी इजाज़त के सेकंड मॉर्गेज किया है, तो आप सिविल कोर्ट में जाकर उस पर स्टे (Stay) ले सकते हैं।

Q3: DRT (Debt Recovery Tribunal) कहाँ होता है? A3: छत्तीसगढ़ के मामलों के लिए DRT आमतौर पर जबलपुर (मध्य प्रदेश) में होता है, जहाँ बड़े बैंक लोन विवादों की सुनवाई होती है।


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यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

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