Partition deed mein do copies kyun banayi jaati hain

विभाजन विलेख (Partition Deed) में दो या उससे अधिक कॉपी (समान दस्तावेज़) इसलिए बनाई जाती हैं ताकि बँटवारे के बाद हर सह-स्वामी (Co-owner) के पास अपने हिस्से (Schedule B) का एक स्वतंत्र और अलग रिकॉर्ड रहे। इससे भविष्य में किसी एक व्यक्ति को अपने हिस्से को बेचने या लोन दिलवाने के लिए दूसरों के कागज़ों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

जब परिवार में बँटवारा होता है, तो एक ही दस्तावेज़ में सभी का हिस्सा लिखा जा सकता है, लेकिन कानूनी सुविधा के लिए वकील अक्सर उसकी कॉपी उतनी ही बनवाते हैं जितने हिस्सेदार होते हैं।

दो या अधिक कॉपी बनाने के मुख्य कारण

1. अलग-अलग अनुसूची “B” (Schedule B): जैसा कि हमने अनुसूची A और B के बारे में पढ़ा, ‘अनुसूची A’ में पूरी प्रॉपर्टी का विवरण होता है, जबकि ‘अनुसूची B’ में हर व्यक्ति के नाम उसका विशिष्ट हिस्सा लिखा होता है। हर कॉपी में एक व्यक्ति की अनुसूची B को हाईलाइट किया जाता है, ताकि वह उसे अपना एकल मालिकाना दस्तावेज़ (Title Deed) मान सके।

2. स्वतंत्र बिक्री का अधिकार: अगर आप अपने हिस्से को आगे बेचना चाहते हैं, तो आपको बैंक या रजिस्ट्रार को अपनी कॉपी दिखानी होगी। बँटवारे के बाद सह-स्वामी के अधिकार का सबूत इसी कॉपी से मिलता है।

3. म्यूटेशन (Mutation) में सुविधा: तहसील कार्यालय में नाम अंतरण करवाते समय, हर व्यक्ति अपनी कॉपी देकर अपने नाम का नया खतियान (Patta) बनवा सकता है, जिससे एक-दूसरे की निर्भरता खत्म हो जाती है।

एक वास्तविक उदाहरण

रायपुर के दो भाइयों ने विभाजन विलेख (Partition Deed) बनवाया। उनके वकील ने दो कॉपी बनवाईं। पहली कॉपी में भाई A की अनुसूची B पहले नंबर पर थी, और दूसरी कॉपी में भाई B की। 2 साल बाद, भाई A को अपनी ज़मीन बेचनी पड़ी। उसने अपनी कॉपी दिखाकर आसानी से रजिस्ट्री करवा ली। अगर एक ही कॉपी होती, तो भाई B को हर बार अपना कागज़ लेकर रजिस्ट्रार आना पड़ता।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या यह दोनों कॉपी अलग-अलग रजिस्टर होती हैं? A1: नहीं, ये दोनों एक ही दस्तावेज़ का हिस्सा हैं। एक ही रजिस्ट्री संख्या (Registration Number) और एक ही तारीख पर दोनों पर हस्ताक्षर होते हैं, बस हर व्यक्ति को अपनी कॉपी दे दी जाती है।

Q2: अगर 3 भाई हों तो कितनी कॉपी बनेंगी? A2: 3 भाइयों के हिस्से के लिए 3 कॉपी बनाई जाएँगी, ताकि हर एक के पास उसके हिस्से का रिकॉर्ड रहे।

Q3: एक कॉपी खो जाए तो क्या करें? A3: रजिस्ट्रार कार्यालय से उस दस्तावेज़ की सर्टिफाइड कॉपी (Certified Copy) निकलवाई जा सकती है, जो मूल कागज़ के बराबर मान्य होती है।


संबंधित लेख:

सभी पारिवारिक बंटवारा लेखों के लिए: पारिवारिक संपत्ति बंटवारा और हस्तांतरण

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

Similar Posts

  • Daan-Patra (Gift Deed) kya hota hai — family member ko property dena

    दान-पत्र (Gift Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी को बिना किसी पैसे के (Free of Cost) अपने किसी परिवार के सदस्य या किसी और को दान (Gift) में दे देता है। इसे कानूनी रूप से लागू करने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराना अनिवार्य होता है। अक्सर माता-पिता अपने…

  • Partition deed mein registration fee aur stamp duty

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी आमतौर पर सेल डीड (Sale Deed) की तुलना में कम लगती है। छत्तीसगढ़ में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी बँटवारे पर स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाती है, जो अक्सर प्रॉपर्टी के मूल्य या हिस्से के एक निर्धारित प्रतिशत पर निर्भर करती है। बँटवारा…

  • Property gift deed mein condition clause kaise add karein (jaise “life-time use only”)

    दान-पत्र (Gift Deed) में एक शर्त (Condition Clause) जोड़ने के लिए दस्तावेज़ के मुख्य भाग में एक खास धारा (Special Clause) लिखी जाती है। उदाहरण के लिए, “life-time use only” (आजीवन उपयोग) की शर्त लगाने के लिए लिखा जाता है कि “यह दान दाता (Donor) के आजीवन इस प्रॉपर्टी में रहने और उपयोग करने के…

  • Partition deed mein anuschi “A” aur “B” kaise banayein

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में अनुसूची (Schedule) “A” और “B” बनाने का तरीका यह है कि ‘अनुसूची A’ में मूल संपत्ति का पूरा विवरण (जो जॉइंट थी) लिखा जाता है, और ‘अनुसूची B’ में बँटवारे के बाद हर सह-स्वामी (Co-owner) को जो विशिष्ट हिस्सा (Specific Share) मिला है, उसका विस्तृत नक्शा और विवरण दर्ज किया…

  • Family dispute mein partition suit file karne ka process

    पारिवारिक विवाद (Family Dispute) में पार्टिशन सूट (Partition Suit) दायर करने का प्रोसेस यह है कि सबसे पहले दूसरे सह-स्वामियों को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा जाता है। अगर बँटवारा नहीं होता, तो एक वकील के ज़रिए सिविल कोर्ट में ‘प्लेंट’ (Plaint) दाखिल किया जाता है, जिसमें कोर्ट से प्रॉपर्टी को बराबर हिस्सों में…

  • Property gift karne ke baad naam antaran (mutation) kaise karayein

    प्रॉपर्टी दान (Gift) करने के बाद नाम अंतरण (Mutation) कराने के लिए आपको रजिस्टर्ड दान-पत्र (Gift Deed) और अपने दस्तावेज़ों के साथ तहसील कार्यालय या नगर निगम (म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) में जाना होता है। वहां एक आवेदन देकर सरकारी रिकॉर्ड (खतियान/प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर) में दाता की जगह ग्रहीता का नाम दर्ज करवाना पड़ता है। दान-पत्र की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *