Bandhak ki rakam se zyada property bik gayi toh baaki paisa kiska

अगर बंधक (Mortgage) ग्रहित प्रॉपर्टी की नीलामी (Auction) में वह लोन की राशि से ज़्यादा कीमत पर बिक जाती है, तो बाकी बची हुई राशि (Surplus) मूल कर्ज़दार (Borrower) को वापस मिलती है। लेनदार (Lender) को सिर्फ अपना बकाया लोन और ब्याज रखने का अधिकार होता है, बची हुई पूरी राशि उसे नहीं रखनी पड़ती।

जब कोई व्यक्ति लोन नहीं चुका पाता, तो लेनदार प्रॉपर्टी को बेचकर अपना पैसा निकालता है। लेकिन कानूनी नियम यह है कि लेनदार प्रॉपर्टी का मालिक नहीं बनता, वह सिर्फ अपना कर्ज़ वसूलता है। अगर प्रॉपर्टी ज़्यादा दाम पर बिकती है, तो वह एक्स्ट्रा पैसा कर्ज़दार का ही रहता है।

बचे हुए पैसे (Surplus) का Process क्या है?

1. लेनदार का हिस्सा (Dues Settlement): नीलामी से जो पैसा मिलता है, उसमें से लेनदार अपना मूल लोन (Principal), ब्याज (Interest), और नीलामी का खर्च (Auction expenses) काट लेता है।

2. कर्ज़दार को वापसी (Refund to Borrower): काटने के बाद जो राशि बचती है, उसे लेनदार कर्ज़दार के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देता है या कोर्ट के माध्यम से जमा करवाता है। बंधक मुक्तिकरण (Mortgage Redemption) के बाद यह राशि देना कानूनी ज़िम्मेदारी है।

अगर प्रॉपर्टी लोन से कम दाम पर बिके तो?

इसके उलट, अगर प्रॉपर्टी नीलामी में लोन की राशि से कम में बिकती है, तो कर्ज़दार पर बाकी बची राशि (Deficiency) का कर्ज़ बना रहता है। लेनदार उस बकाये को वसूलने के लिए कर्ज़दार की अन्य संपत्ति पर कोर्ट के ज़रिए कार्रवाई कर सकता है।

(यह नियम तब लागू होता है जब प्रॉपर्टी लोन न चुकाने पर बंधक ग्रहित प्रॉपर्टी बेची जाती है)।

एक वास्तविक उदाहरण

भिलाई के एक व्यक्ति ने ₹20 लाख का लोन लिया था और अपना घर बंधक रखा था। वह लोन नहीं चुका पाया, तो बैंक ने घर की नीलामी कर दी। घर ₹30 लाख में बिक गया। बैंक ने अपने ₹20 लाख, ₹3 लाख ब्याज और नीलामी का ₹1 लाख खर्च काट लिया। बचे हुए ₹6 लाख बैंक ने कर्ज़दार के खाते में वापस कर दिए। अगर कर्ज़दार ने यह ज़मीन पैतृक (Ancestral) थी और बंटवारे की स्थिति में थी, तो पैतृक बनाम स्व-अर्जित संपत्ति के बंटवारे के नियम भी लागू होंगे।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या लेनदार बचे हुए पैसे को रोक सकता है? A1: नहीं, बची हुई राशि (Surplus) को रोकना कानूनी अपराध है। अगर लेनदार रोकता है, तो कर्ज़दार बंधक विवाद में सिविल कोर्ट में अपील कर सकता है।

Q2: अगर कर्ज़दार मृत हो गया हो, तो बची राशि किसे मिलेगी? A2: वह राशि कर्ज़दार के कानूनी वारिस (Heirs) को मिलेगी। बंधक ग्रहित की डेथ होने पर क्या होता है, यह देखकर ही वारिसों को पैसा मिलेगा।

Q3: खरीददार को पता कैसे चलेगा कि प्रॉपर्टी पर कितना कर्ज़ था? A3: खरीददार नीलामी से पहले प्रॉपर्टी खरीदते समय टाइटल वेरिफिकेशन करवाकर बैंक से बकाया का ब्यौरा ले सकता है।


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सभी बंधक और लोन लेखों के लिए: बंधक और लोन दस्तावेज़

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]


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