Ancestral property vs self-acquired property partition mein farak

पैतृक (Ancestral) और स्व-अर्जित (Self-acquired) संपत्ति के बंटवारे में मुख्य फर्क यह है कि पैतृक संपत्ति में बच्चों का हक जन्म से बनता है और उसे बराबर बाँटा जाता है, जबकि स्व-अर्जित संपत्ति में मालिक के जीवित रहते बच्चों का कोई हक नहीं होता; मालिक अपनी मर्जी से उसे किसी को भी दे या बाँट सकता है।

प्रॉपर्टी के बँटवारे के विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि प्रॉपर्टी ‘पैतृक’ है या ‘स्व-अर्जित’। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, दोनों के बँटवारे के नियम बिल्कुल अलग हैं।

पैतृक (Ancestral) और स्व-अर्जित (Self-acquired) में अंतर

1. हक कैसे बनता है (Right of Birth):

  • पैतृक संपत्ति: यह 4 पीढ़ियों से ऊपर से चली आई संपत्ति होती है। इसमें बच्चों (बेटा-बेटी) का हक जन्म से ही बन जाता है। संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति का बराबर बँटवारा इसी नियम के तहत होता है।
  • स्व-अर्जित संपत्ति: जो ज़मीन या घर मालिक ने अपनी कमाई से खरीदा या बनाया है। इसमें मालिक के जीवित रहते बच्चों का कोई कानूनी हक नहीं होता।

2. बँटवारे का अधिकार (Right to Partition):

  • पैतृक संपत्ति: इसमें कोई भी बच्चा कभी भी विभाजन विलेख (Partition Deed) की मांग कर सकता है।
  • स्व-अर्जित संपत्ति: इसका बँटवारा मालिक की मर्जी से ही होता है। वह चाहे तो इसे बराबर बाँटे, या दान-पत्र (Gift Deed) के ज़रिए किसी एक को दे दे।

3. वसीयत (Will) का अधिकार:

  • पैतृक संपत्ति: मालिक पैतृक संपत्ति को अपनी मर्जी से वसीयत में किसी एक को नहीं दे सकता। यह बराबर बँटेगी।
  • स्व-अर्जित संपत्ति: मालिक अपनी स्व-अर्जित संपत्ति को वसीयत के ज़रिए किसी को भी दे सकता है, यहाँ तक कि किसी बाहरी व्यक्ति को भी।

एक वास्तविक उदाहरण

भिलाई के एक व्यक्ति ने अपनी कमाई के पैसों से एक घर बनाया (स्व-अर्जित)। उसके दो बेटे थे। उसने अपनी ज़िंदगी में एक वसीयत लिख दी कि घर बड़े बेटे को मिलेगा, छोटे बेटे को नहीं। छोटे बेटे ने कोर्ट में कहा कि यह पैतृक संपत्ति है। कोर्ट ने जांच की और पाया कि यह स्व-अर्जित है, इसलिए पिता की वसीयत मान्य है और छोटे बेटे का हक नहीं बनता।

(यही कारण है कि परिवार के सदस्य की प्रॉपर्टी पर बंधक रखते समय भी यह चेक किया जाता है कि प्रॉपर्टी पैतृक है या स्व-अर्जित।)

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या पिता अपनी स्व-अर्जित संपत्ति को बिना वसीयत बेटों में बाँट सकता है? A1: हां, वह दान-पत्र (Gift Deed) के ज़रिए बाँट सकता है या विभाजन विलेख (Partition Deed) के ज़रिए अपनी मर्जी से बाँट सकता है।

Q2: माँ की मिली हुई संपत्ति ‘पैतृक’ मानी जाएगी? A2: नहीं, अगर पिता ने माँ को संपत्ति दी थी, तो वह माँ की स्व-अर्जित संपत्ति बन जाती है, पैतृक नहीं।

Q3: क्या पैतृक संपत्ति को बिना बच्चों के हस्ताक्षर के बेचा जा सकता है? A3: नहीं, पैतृक संपत्ति को बेचने के लिए सभी बच्चों (हिस्सेदारों) की सहमति ज़रूरी है।


संबंधित लेख:

सभी पारिवारिक बंटवारा लेखों के लिए: पारिवारिक संपत्ति बंटवारा और हस्तांतरण (Pillar Page)

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

Similar Posts

  • Property gift karne se pehle encumbrance check kyun zaroori hai

    प्रॉपर्टी दान (Gift) करने से पहले Encumbrance (एनकम्ब्रेंस) चेक करना इसलिए ज़रूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रॉपर्टी पर कोई पहले से कर्ज़ (Mortgage/Loan) या कानूनी विवाद तो नहीं है। अगर प्रॉपर्टी पहले से बैंक में गिरवी (Mortgaged) है, तो उसे दान में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। जब आप किसी को प्रॉपर्टी…

  • Family dispute mein partition suit file karne ka process

    पारिवारिक विवाद (Family Dispute) में पार्टिशन सूट (Partition Suit) दायर करने का प्रोसेस यह है कि सबसे पहले दूसरे सह-स्वामियों को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा जाता है। अगर बँटवारा नहीं होता, तो एक वकील के ज़रिए सिविल कोर्ट में ‘प्लेंट’ (Plaint) दाखिल किया जाता है, जिसमें कोर्ट से प्रॉपर्टी को बराबर हिस्सों में…

  • Gift deed mein daata aur grahita ke rights kya hote hain

    दान-पत्र (Gift Deed) में दाता (Donor) का अधिकार यह होता है कि वह प्रॉपर्टी को बिना किसी शर्त के दान कर सकता है, और एक बार दान देने के बाद उसका प्रॉपर्टी पर सारा मालिकाना हक खत्म हो जाता है। वहीं ग्रहीता (Donee) का अधिकार होता है कि वह उस प्रॉपर्टी का पूरा और स्वतंत्र…

  • Partition deed mein anuschi “A” aur “B” kaise banayein

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में अनुसूची (Schedule) “A” और “B” बनाने का तरीका यह है कि ‘अनुसूची A’ में मूल संपत्ति का पूरा विवरण (जो जॉइंट थी) लिखा जाता है, और ‘अनुसूची B’ में बँटवारे के बाद हर सह-स्वामी (Co-owner) को जो विशिष्ट हिस्सा (Specific Share) मिला है, उसका विस्तृत नक्शा और विवरण दर्ज किया…

  • Minor (nabalig) ke naam property partition kaise hoti hai

    नाबालिग (Minor) के नाम पर प्रॉपर्टी का बँटवारा (Partition) या ट्रांसफर हो सकता है। इसमें नाबालिग के कानूनी संरक्षक (Guardian – आमतौर पर माता-पिता) उसकी ओर से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करते हैं। हालांकि, नाबालिग के हिस्से को बेचने या गिरवी रखने के लिए ज़िला जज या कोर्ट की विशेष अनुमति (Court Permission) लेना अनिवार्य होता…

  • Joint Hindu family property ka baraabar batwara kaise karein

    संयुक्त हिंदू परिवार (Joint Hindu Family) की संपत्ति का बराबर बँटवारा (Equal Partition) करने के लिए सभी सह-स्वामियों (Coparceners) की आपसी सहमति से एक विभाजन विलेख (Partition Deed) बनाना होता है, जिसमें हर एक को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के अनुसार समान हिस्सा (Equal Share) दिया जाता है। एक जॉइंट हिंदू परिवार में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *