• Daan-Patra (Gift Deed) kya hota hai — family member ko property dena

    दान-पत्र (Gift Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी को बिना किसी पैसे के (Free of Cost) अपने किसी परिवार के सदस्य या किसी और को दान (Gift) में दे देता है। इसे कानूनी रूप से लागू करने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराना अनिवार्य होता है। अक्सर माता-पिता अपने…

  • Family property partition mein dispute ho jaye toh solution

    अगर पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे में विवाद (Dispute) हो जाए, तो इसका समाधान सबसे पहले परिवार के बुज़ुर्गों या मध्यस्थों (Mediators) की मदद से आपसी समझौते से करने की कोशिश करें। अगर बात न बने, तो एक कानूनी नोटिस भेजें और फिर सिविल कोर्ट में ‘पार्टिशन सूट’ (Partition Suit) दायर करके कोर्ट के ज़रिए प्रॉपर्टी…

  • Bandhak dispute mein Cooperative Court/Civil Court kahan jaana hai

    बंधक (Mortgage) विवाद की स्थिति में कोर्ट जाने का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि लेनदार (Lender) कौन है। अगर लेनदार कोई बैंक या निजी व्यक्ति है, तो सिविल कोर्ट (Civil Court) या DRT (Debt Recovery Tribunal) जाना पड़ता है। लेकिन अगर लोन किसी सहकारी समिति (Cooperative Society) ने दिया था, तो सहकारी…

  • Property bandhak rakhne se pehle valuation kaise karayein

    प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखने से पहले वैल्यूएशन (Valuation) कराने के लिए आपको बैंक या लेनदार द्वारा मंज़ूर किए गए किसी सरकारी-पंजीकृत वैल्यूएटर (Valuator) को बुलाना पड़ता है। वह प्रॉपर्टी की वर्तमान स्थिति, लोकेशन और सर्किल रेट (Circle Rate) के आधार पर उसका बाज़ार मूल्य (Market Value) तय करता है, जिससे तय होता है कि आपको…

  • Bandhak vilekh vs equitable mortgage — CG mein kaunsa common hai

    बंधक विलेख (Registered Mortgage Deed) और Equitable Mortgage (समानुपातिक बंधक) में मुख्य फर्क यह है कि बंधक विलेख को सब-रजिस्ट्रार में रजिस्टर कराना पड़ता है, जबकि Equitable Mortgage में सिर्फ प्रॉपर्टी के मूल कागज़ (Title Deeds) बैंक को जमा कर दिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में बैंकों के मामलों में Equitable Mortgage ज़्यादा common (आम) है।…

  • Loan chukane ke baad receipt/documents kitne din rakhne chahiye

    लोन चुकाने के बाद रसीदें और दस्तावेज़ (NOC, Closure Letter, Release Deed) कम से कम तब तक रखने चाहिए जब तक आप उस प्रॉपर्टी के मालिक हैं या उसे बेच नहीं देते। बेहतर होगा कि इन्हें स्थायी (Permanent) रूप से सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के बंधक (Mortgage) विवाद से बचा…

  • Bandhak grahita ki death ho jaye toh kya hota hai deed ka

    अगर बंधक ग्रहित (Mortgagor/कर्ज़दार) की डेथ हो जाती है, तो बंधक विलेख (Mortgage Deed) खत्म नहीं होता। लोन की ज़िम्मेदारी और प्रॉपर्टी दोनों कानूनी रूप से उसके वारिसों (Legal Heirs) को चली जाती है। वारिसों को या तो लोन चुकाकर प्रॉपर्टी को मुक्त (Redeem) करना होता है या फिर लेनदार प्रॉपर्टी को नीलाम कर अपना…

  • Second mortgage (same property do baar bandhak) legal hai kya

    हां, एक ही प्रॉपर्टी पर दोबारा बंधक (Second Mortgage) लगाना कानूनी रूप से संभव है, लेकिन इसके लिए पहले लेनदार (First Lender) की लिखित अनुमति (NOC) चाहिए होती है और प्रॉपर्टी की कुछ खाली वैल्यू (Equity) बची होनी चाहिए। बिना NOC के दूसरा बंधक कानूनी रूप से अमान्य (Invalid) है। अक्सर लोग एक बैंक से…

  • Partition deed registration mandatory hai kya

    हां, विभाजन विलेख (Partition Deed) की रजिस्ट्रेशन सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में कराना पूरी तरह से अनिवार्य (Mandatory) है। Registration Act, 1908 के अनुसार, बिना रजिस्ट्री का बँटवारा कानूनी रूप से अमान्य (Invalid) है, और उसे कोर्ट या रजिस्ट्रार द्वारा मान्यता नहीं दी जाती। कई बार परिवार आपस में एक सादे कागज़ पर बँटवारा लिखकर साइन कर…

  • Property partition ke baad har sahswami ka independent right kya hota hai

    प्रॉपर्टी बंटवारे (Partition) के बाद हर सह-स्वामी (Co-owner) का स्वतंत्र अधिकार (Independent Right) यह होता है कि वह अपने हिस्से को बिना किसी दूसरे सह-स्वामी की अनुमति लिए बेच सकता है, लोन के लिए बंधक (Mortgage) रख सकता है, या किसी को दान (Gift) कर सकता है। उस पर अब परिवार का कोई संयुक्त हक…