• Partition deed mein anuschi “A” aur “B” kaise banayein

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में अनुसूची (Schedule) “A” और “B” बनाने का तरीका यह है कि ‘अनुसूची A’ में मूल संपत्ति का पूरा विवरण (जो जॉइंट थी) लिखा जाता है, और ‘अनुसूची B’ में बँटवारे के बाद हर सह-स्वामी (Co-owner) को जो विशिष्ट हिस्सा (Specific Share) मिला है, उसका विस्तृत नक्शा और विवरण दर्ज किया…

  • Joint Hindu family property ka baraabar batwara kaise karein

    संयुक्त हिंदू परिवार (Joint Hindu Family) की संपत्ति का बराबर बँटवारा (Equal Partition) करने के लिए सभी सह-स्वामियों (Coparceners) की आपसी सहमति से एक विभाजन विलेख (Partition Deed) बनाना होता है, जिसमें हर एक को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के अनुसार समान हिस्सा (Equal Share) दिया जाता है। एक जॉइंट हिंदू परिवार में…

  • Vibhajan Vilekh (Partition Deed) kya hota hai aur kab zaroorat padti hai

    विभाजन विलेख (Partition Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए संयुक्त परिवार की संपत्ति (Joint Family Property) को सभी सह-स्वामियों (Co-owners) के बीच बाँट दिया जाता है। इसकी ज़रूरत तब पड़ती है जब परिवार के सदस्य अलग-अलग होना चाहें, अपने हिस्से पर स्वतंत्र मालिकाना हक (Independent Ownership) चाहें, या प्रॉपर्टी को बेचने/लोन दिलवाने की नियत…

  • Bandhak deed mein successor/heir clause kyun important hai

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) में Successor/Heir (वारिस) क्लॉज इसलिए ज़रूरी है ताकि कर्ज़दार (Borrower) की मृत्यु होने पर लोन की ज़िम्मेदारी और प्रॉपर्टी का बंधक कानूनी रूप से उसके वारिसों (Heirs) पर चला जाए। इस क्लॉज के बिना, लेनदार (Lender) को अपना पैसा वसूलने में कानूनी दिक्कतें आती हैं और परिवार में विवाद हो सकते…

  • Property bandhak rakhte waqt stamp duty kitni lagti hai CG mein

    छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखते समय स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) आमतौर पर लोन की कुल राशि या प्रॉपर्टी की वैल्यू (जो भी कम हो) का एक निर्धारित प्रतिशत लगती है। यह दर सेल डीड (Sale Deed) की स्टांप ड्यूटी से अलग और अक्सर कम होती है। बंधक विलेख (Mortgage Deed) को कानूनी रूप देने…

  • Informal loan (bina bandhak) vs registered mortgage — risk comparison

    अनौपचारिक लोन (Informal Loan) में सिर्फ सादे कागज़ पर गिरवी रखने का ज़िक्र होता है, जिसमें धोखाधड़ी और विवाद का खतरा बहुत ज़्यादा होता है। वहीं, Registered Mortgage (रजिस्टर्ड बंधक) में सब-रजिस्ट्रार में कानूनी दस्तावेज़ दर्ज होता है, जिससे लेनदार और कर्ज़दार दोनों के अधिकार कानूनी रूप से सुरक्षित रहते हैं। जब जल्दी पैसे चाहिए…

  • Bandhak deed cancel/release karne ka format aur process

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) को कैंसिल या रिलीज (Release) करने के लिए लेनदार (Lender) द्वारा एक ‘Release Deed’ या ‘Reconveyance Deed’ तैयार किया जाता है। इसमें यह घोषित किया जाता है कि लोन चुक गया है, और इसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराकर बंधक खत्म किया जाता है। लोन का पूरा पैसा चुकाने के बाद…

  • Family member ki property par bandhak — kya extra precaution chahiye

    परिवार के किसी सदस्य की प्रॉपर्टी पर बंधक (Mortgage) रखकर लोन लेने पर एक्स्ट्रा सावधानी यह ज़रूरी है कि दस्तावेज़ में साफ लिखा हो कि लोन किसने लिया है, और लोन न चुकने की स्थिति में प्रॉपर्टी मालिक को इसका विरोध करने का क्लियर राइट (Right) पता हो। साथ ही, प्रॉपर्टी मालिक की विधवा/वारिस के…

  • Bandhak ki rakam se zyada property bik gayi toh baaki paisa kiska

    अगर बंधक (Mortgage) ग्रहित प्रॉपर्टी की नीलामी (Auction) में वह लोन की राशि से ज़्यादा कीमत पर बिक जाती है, तो बाकी बची हुई राशि (Surplus) मूल कर्ज़दार (Borrower) को वापस मिलती है। लेनदार (Lender) को सिर्फ अपना बकाया लोन और ब्याज रखने का अधिकार होता है, बची हुई पूरी राशि उसे नहीं रखनी पड़ती।…

  • Mortgage deed vs sale deed — kya farak hai legally

    बंधक विलेख (Mortgage Deed) और सेल डीड (Sale Deed) में मुख्य कानूनी फर्क यह है कि बंधक में प्रॉपर्टी को सिर्फ लोन की सुरक्षा (Security) के लिए गिरवी रखा जाता है और मालिकाना हक (Ownership) कर्ज़दार के पास ही रहता है, जबकि सेल डीड में प्रॉपर्टी का मालिकाना हक हमेशा के लिए खरीददार के नाम…