• Tenant ko sub-let karne ka right hota hai kya bina permission

    नहीं, किरायेदार (Tenant) को बिना मकान मालिक (Landlord) की लिखित अनुमति के घर को सब-लेट (Sub-let) करने या किसी तीसरे को किराये पर देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता। ऐसा करना किरायानामे (Rent Agreement) की शर्तों का सीधा उल्लंघन है, जिसके आधार पर मालिक किरायेदार को घर से बेदखल (Evict) कर सकता है। कई…

  • Rent agreement mein deposit vs advance rent ka farak

    रेंट एग्रीमेंट में Security Deposit (सिक्योरिटी डिपॉजिट) वह राशि है जो प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए मालिक के पास ब्लॉक रहती है और घर खाली करते समय किरायेदार को वापस मिलती है। वहीं Advance Rent (अग्रिम किराया) वह राशि है जो पहले से किराये के रूप में दे दी जाती है (जैसे 2-3 महीने का…

  • Kirayanama (Rent Agreement) mein zaroori clauses kya hone chahiye

    किरायानामा (Rent Agreement) में कुछ ज़रूरी क्लॉज (Clauses) होने अनिवार्य हैं: किराये की राशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट, लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period), नोटिस पीरियड (Notice Period), मेंटेनेंस की ज़िम्मेदारी, और उपयोग की शर्तें (Residential/Commercial)। इन क्लॉज के बिना किरायेदार या मकान मालिक को कानूनी परेशानी हो सकती है। किसी भी प्रॉपर्टी को किराये पर देते या लेते…

  • Patta ke tahat banaye gaye ghar ko rent pe dena — legal hai kya

    हां, पट्टे (Patta/Lease) के तहत बनाए गए घर को किराये (Rent) पर देना कानूनी (Legal) है, बशर्ते कि पट्टा विलेख (Lease Deed) में स्पष्ट रूप से इस पर रोक न लगाई गई हो। हालांकि, पट्टेदार (Lessee) को किरायेदार (Tenant) के नाम पर पुलिस वेरिफिकेशन कराना और एक वैध किरायानामा (Rent Agreement) बनाना अनिवार्य होता है।…

  • Patta ki 30 saal ki avadhi khatam hone par renewal kaise karein

    पट्टे (Patta) की 30 साल की अवधि खत्म होने पर उसे रिन्यू (Renew) करने के लिए आपको उस अथॉरिटी (जिसने पट्टा दिया था) को अवधि खत्म होने से 6 महीने पहले आवेदन करना होता है। इसमें बकाया Ground Rent, नवीनीकरण शुल्क (Renewal Fee) भरकर एक ‘Supplementary Lease Deed’ (पूरक पट्टा विलेख) रजिस्ट्रार में दर्ज करानी…

  • Patta Vilekh kya hota hai — Bhu-khand lease ka process

    पट्टा विलेख (Patta Vilekh) या लीज़ डीड (Lease Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए सरकार या किसी अथॉरिटी अपनी ज़मीन का एक हिस्सा (Bhu-khand) किसी व्यक्ति को एक निश्चित अवधि (जैसे 30 या 99 साल) के लिए लीज़ (Lease) पर देती है। इसमें ज़मीन का मालिकाना हक सरकार के पास रहता है, लेकिन उपयोग…

  • Property gift deed mein condition clause kaise add karein (jaise “life-time use only”)

    दान-पत्र (Gift Deed) में एक शर्त (Condition Clause) जोड़ने के लिए दस्तावेज़ के मुख्य भाग में एक खास धारा (Special Clause) लिखी जाती है। उदाहरण के लिए, “life-time use only” (आजीवन उपयोग) की शर्त लगाने के लिए लिखा जाता है कि “यह दान दाता (Donor) के आजीवन इस प्रॉपर्टी में रहने और उपयोग करने के…

  • Partition deed cancel karne ka legal process

    विभाजन विलेख (Partition Deed) को रद्द (Cancel) करने के लिए सभी सह-स्वामियों (Co-owners) की आपसी सहमति से एक ‘रद्दीकरण विलेख’ (Cancellation Deed) बनाकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज कराना पड़ता है। अगर कोई एक भाई भी रद्द करने को तैयार नहीं है, तो उसे सिविल कोर्ट में केस करके ही रद्द करवाया जा सकता है। कभी-कभी…

  • Minor (nabalig) ke naam property partition kaise hoti hai

    नाबालिग (Minor) के नाम पर प्रॉपर्टी का बँटवारा (Partition) या ट्रांसफर हो सकता है। इसमें नाबालिग के कानूनी संरक्षक (Guardian – आमतौर पर माता-पिता) उसकी ओर से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करते हैं। हालांकि, नाबालिग के हिस्से को बेचने या गिरवी रखने के लिए ज़िला जज या कोर्ट की विशेष अनुमति (Court Permission) लेना अनिवार्य होता…

  • Ancestral property vs self-acquired property partition mein farak

    पैतृक (Ancestral) और स्व-अर्जित (Self-acquired) संपत्ति के बंटवारे में मुख्य फर्क यह है कि पैतृक संपत्ति में बच्चों का हक जन्म से बनता है और उसे बराबर बाँटा जाता है, जबकि स्व-अर्जित संपत्ति में मालिक के जीवित रहते बच्चों का कोई हक नहीं होता; मालिक अपनी मर्जी से उसे किसी को भी दे या बाँट…