• Gift deed revoke/cancel ho sakta hai kya

    दान-पत्र (Gift Deed) को आमतौर पर रजिस्ट्री के बाद रद्द (Revoke/Cancel) नहीं किया जा सकता। हालांकि, Transfer of Property Act के अनुसार, अगर दाता (Donor) और ग्रहीता (Donee) दोनों की आपसी सहमति हो, तो एक ‘रद्दीकरण विलेख’ (Cancellation Deed) बनाकर रजिस्ट्रार में दर्ज कराके इसे रद्द किया जा सकता है। एकतरफा रद्दीकरण बहुत मुश्किल है।…

  • Gift deed vs Will — kaunsa better hai property transfer ke liye

    दान-पत्र (Gift Deed) और वसीयत (Will) दोनों प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने के कानूनी तरीके हैं, लेकिन इनमें मुख्य फर्क यह है कि दान-पत्र प्रॉपर्टी का हक तुरंत (जीवित रहते) दे देता है, जबकि वसीयत में प्रॉपर्टी मालिक की मृत्यु के बाद ही ट्रांसफर होती है। अक्सर माता-पिता यह सोचकर घबराते हैं कि अपनी प्रॉपर्टी बच्चों को…

  • Krishi bhoomi (agricultural land) gift karne ka special process CG mein

    छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि (Agricultultural Land) को दान (Gift) करने का प्रोसेस सामान्य आवासीय प्रॉपर्टी से अलग है। इसके लिए सब-रजिस्ट्रार में दान-पत्र (Gift Deed) रजिस्टर कराने के साथ-साथ, तहसील कार्यालय में एक आवेदन देना पड़ता है ताकि सरकार यह पुष्टि करे कि दान लेने वाला (ग्रहीता) कृषि करने के योग्य (किसान) है या नहीं।…

  • Gift deed mein daata aur grahita ke rights kya hote hain

    दान-पत्र (Gift Deed) में दाता (Donor) का अधिकार यह होता है कि वह प्रॉपर्टी को बिना किसी शर्त के दान कर सकता है, और एक बार दान देने के बाद उसका प्रॉपर्टी पर सारा मालिकाना हक खत्म हो जाता है। वहीं ग्रहीता (Donee) का अधिकार होता है कि वह उस प्रॉपर्टी का पूरा और स्वतंत्र…

  • Daan-Patra (Gift Deed) kya hota hai — family member ko property dena

    दान-पत्र (Gift Deed) एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी को बिना किसी पैसे के (Free of Cost) अपने किसी परिवार के सदस्य या किसी और को दान (Gift) में दे देता है। इसे कानूनी रूप से लागू करने के लिए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराना अनिवार्य होता है। अक्सर माता-पिता अपने…

  • Family property partition mein dispute ho jaye toh solution

    अगर पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे में विवाद (Dispute) हो जाए, तो इसका समाधान सबसे पहले परिवार के बुज़ुर्गों या मध्यस्थों (Mediators) की मदद से आपसी समझौते से करने की कोशिश करें। अगर बात न बने, तो एक कानूनी नोटिस भेजें और फिर सिविल कोर्ट में ‘पार्टिशन सूट’ (Partition Suit) दायर करके कोर्ट के ज़रिए प्रॉपर्टी…

  • Bandhak dispute mein Cooperative Court/Civil Court kahan jaana hai

    बंधक (Mortgage) विवाद की स्थिति में कोर्ट जाने का निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि लेनदार (Lender) कौन है। अगर लेनदार कोई बैंक या निजी व्यक्ति है, तो सिविल कोर्ट (Civil Court) या DRT (Debt Recovery Tribunal) जाना पड़ता है। लेकिन अगर लोन किसी सहकारी समिति (Cooperative Society) ने दिया था, तो सहकारी…

  • Property bandhak rakhne se pehle valuation kaise karayein

    प्रॉपर्टी बंधक (Mortgage) रखने से पहले वैल्यूएशन (Valuation) कराने के लिए आपको बैंक या लेनदार द्वारा मंज़ूर किए गए किसी सरकारी-पंजीकृत वैल्यूएटर (Valuator) को बुलाना पड़ता है। वह प्रॉपर्टी की वर्तमान स्थिति, लोकेशन और सर्किल रेट (Circle Rate) के आधार पर उसका बाज़ार मूल्य (Market Value) तय करता है, जिससे तय होता है कि आपको…

  • Bandhak vilekh vs equitable mortgage — CG mein kaunsa common hai

    बंधक विलेख (Registered Mortgage Deed) और Equitable Mortgage (समानुपातिक बंधक) में मुख्य फर्क यह है कि बंधक विलेख को सब-रजिस्ट्रार में रजिस्टर कराना पड़ता है, जबकि Equitable Mortgage में सिर्फ प्रॉपर्टी के मूल कागज़ (Title Deeds) बैंक को जमा कर दिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में बैंकों के मामलों में Equitable Mortgage ज़्यादा common (आम) है।…

  • Loan chukane ke baad receipt/documents kitne din rakhne chahiye

    लोन चुकाने के बाद रसीदें और दस्तावेज़ (NOC, Closure Letter, Release Deed) कम से कम तब तक रखने चाहिए जब तक आप उस प्रॉपर्टी के मालिक हैं या उसे बेच नहीं देते। बेहतर होगा कि इन्हें स्थायी (Permanent) रूप से सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के बंधक (Mortgage) विवाद से बचा…