• Family dispute mein partition suit file karne ka process

    पारिवारिक विवाद (Family Dispute) में पार्टिशन सूट (Partition Suit) दायर करने का प्रोसेस यह है कि सबसे पहले दूसरे सह-स्वामियों को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा जाता है। अगर बँटवारा नहीं होता, तो एक वकील के ज़रिए सिविल कोर्ट में ‘प्लेंट’ (Plaint) दाखिल किया जाता है, जिसमें कोर्ट से प्रॉपर्टी को बराबर हिस्सों में…

  • Property partition ke baad naye documents mein registration

    प्रॉपर्टी के बँटवारे (Partition) के बाद नए दस्तावेज़ों में रजिस्ट्रेशन का मतलब है तहसील कार्यालय में म्यूटेशन (नाम अंतरण) कराकर हर सह-स्वामी के नाम पर अलग-अलग नया खतियान (Patta) और नक्शा जारी करवाना। इसके बिना सरकारी रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी अभी भी ‘जॉइंट’ (Joint) ही दिखेगी। बँटवारे का दस्तावेज़ रजिस्ट्रार में दर्ज हो जाने का मतलब…

  • Partition deed mein registration fee aur stamp duty

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी आमतौर पर सेल डीड (Sale Deed) की तुलना में कम लगती है। छत्तीसगढ़ में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी बँटवारे पर स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाती है, जो अक्सर प्रॉपर्टी के मूल्य या हिस्से के एक निर्धारित प्रतिशत पर निर्भर करती है। बँटवारा…

  • Widow/widower ke property rights partition mein

    विधवा (Widow) के प्रॉपर्टी अधिकार (Rights) बँटवारे में यह हैं कि पति की मृत्यु के बाद वह पति के हिस्से की पूरी मालिक बन जाती है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, संयुक्त परिवार की संपत्ति के बँटवारे में विधवा को पति के हिस्से के बराबर हिस्सा मिलता है और उसे बेचने या रखने का पूरा…

  • Second marriage ke baad property partition ke complications

    दूसरी शादी (Second Marriage) के बाद प्रॉपर्टी के बँटवारे में जटिलताएं (Complications) इसलिए आती हैं क्योंकि पहली पत्नी के बच्चों और दूसरी पत्नी तथा उसके बच्चों के कानूनी अधिकार (Legal Rights) अलग-अलग होते हैं। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, दोनों पक्षों के हिस्से तय करने में अक्सर पारिवारिक विवाद हो जाते हैं। जब किसी व्यक्ति…

  • Partition deed mein do copies kyun banayi jaati hain

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में दो या उससे अधिक कॉपी (समान दस्तावेज़) इसलिए बनाई जाती हैं ताकि बँटवारे के बाद हर सह-स्वामी (Co-owner) के पास अपने हिस्से (Schedule B) का एक स्वतंत्र और अलग रिकॉर्ड रहे। इससे भविष्य में किसी एक व्यक्ति को अपने हिस्से को बेचने या लोन दिलवाने के लिए दूसरों के कागज़ों…

  • Property gift karne ke baad naam antaran (mutation) kaise karayein

    प्रॉपर्टी दान (Gift) करने के बाद नाम अंतरण (Mutation) कराने के लिए आपको रजिस्टर्ड दान-पत्र (Gift Deed) और अपने दस्तावेज़ों के साथ तहसील कार्यालय या नगर निगम (म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन) में जाना होता है। वहां एक आवेदन देकर सरकारी रिकॉर्ड (खतियान/प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर) में दाता की जगह ग्रहीता का नाम दर्ज करवाना पड़ता है। दान-पत्र की…

  • Gift deed mein Section 165 CG Land Revenue Code ka reference kyun hota hai

    कृषि भूमि के दान-पत्र (Gift Deed) में Section 165 (धारा 165) का संदर्भ इसलिए दिया जाता है क्योंकि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (CG Land Revenue Code) की इस धारा के तहत यह तय किया गया है कि किसान अपनी कृषि भूमि को अपने परिवार के सदस्यों को दान (Gift) या वसीयत (Will) के ज़रिए कैसे ट्रांसफर…

  • Khasra number aur Patwari Halka number ka matlab documents mein

    दस्तावेज़ों में Khasra number (खसरा नंबर) का मतलब है गाँव के राजस्व रिकॉर्ड में आपके खेत या ज़मीन के विशिष्ट भूखंड (Plot) का नंबर। वहीं Patwari Halka number (पटवारी हल्का नंबर) उस राजस्व क्षेत्र का कोड है जिसके अंतर्गत आपकी ज़मीन आती है। प्रॉपर्टी से जुड़े किसी भी कानूनी काम के लिए इन दोनों नंबरों…

  • Property gift karne se pehle encumbrance check kyun zaroori hai

    प्रॉपर्टी दान (Gift) करने से पहले Encumbrance (एनकम्ब्रेंस) चेक करना इसलिए ज़रूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रॉपर्टी पर कोई पहले से कर्ज़ (Mortgage/Loan) या कानूनी विवाद तो नहीं है। अगर प्रॉपर्टी पहले से बैंक में गिरवी (Mortgaged) है, तो उसे दान में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। जब आप किसी को प्रॉपर्टी…