Gift deed revoke/cancel ho sakta hai kya

दान-पत्र (Gift Deed) को आमतौर पर रजिस्ट्री के बाद रद्द (Revoke/Cancel) नहीं किया जा सकता। हालांकि, Transfer of Property Act के अनुसार, अगर दाता (Donor) और ग्रहीता (Donee) दोनों की आपसी सहमति हो, तो एक ‘रद्दीकरण विलेख’ (Cancellation Deed) बनाकर रजिस्ट्रार में दर्ज कराके इसे रद्द किया जा सकता है। एकतरफा रद्दीकरण बहुत मुश्किल है।

एक बार जब प्रॉपर्टी दान दे दी जाती है, तो उसे वापस लेना आसान नहीं होता। लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में कानूनी रूप से दान-पत्र को रद्द (Cancel) किया जा सकता है।

दान-पत्र रद्द करने के तरीके और शर्तें

1. आपसी सहमति (Mutual Consent): अगर दाता और ग्रहीता दोनों मान जाएं कि दान-पत्र रद्द कर दिया जाए, तो वे एक ‘Cancellation Deed’ (रद्दीकरण विलेख) बनाकर रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर करा सकते हैं। इसके लिए दोनों की उपस्थिति ज़रूरी है।

2. शर्त का उल्लंघन (Breach of Condition): अगर दान-पत्र में कोई शर्त लगाई गई थी (जैसे दाता के आजीवन उपयोग की शर्त) और ग्रहीता ने उस शर्त को तोड़ दिया, तो दाता कोर्ट में जाकर दान-पत्र रद्द करवा सकता है।

3. धोखाधड़ी (Fraud) या ज़बरदस्ती (Coercion): अगर दान-पत्र बिना दाता की मर्जी से या उसे धोखा देकर साइन करवाया गया था, तो दाता सिविल कोर्ट में केस करके उसे रद्द करा सकता है।

एक वास्तविक उदाहरण

दुर्ग के एक व्यक्ति ने अपने भाई को ज़मीन दान में दे दी। दान-पत्र में शर्त लिखी थी कि भाई उस ज़मीन का एक हिस्सा दाता के बच्चों के नाम रखेगा। जब भाई ने ऐसा नहीं किया और ज़मीन बेचने की कोशिश की, तो दाता ने कोर्ट में दान-पत्र रद्द (Revoke) करने का केस किया। कोर्ट ने दाता के पक्ष में फैसला दिया क्योंकि शर्त टूटी थी। इसके बाद उन्होंने रद्दीकरण विलेख रजिस्टर किया।

(ध्यान दें: अगर दान-पत्र में कोई शर्त नहीं थी, तो प्रॉपर्टी खरीदते समय Encumbrance Certificate में वह प्रॉपर्टी ग्रहीता की ही दिखेगी।)

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या दाता अकेले एक आम दान-पत्र (बिना शर्त) को रद्द कर सकता है? A1: नहीं, बिना ग्रहीता की सहमति या बिना धोखाधड़ी साबित किए एक आम दान-पत्र को एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता।

Q2: रद्दीकरण विलेख (Cancellation Deed) में स्टांप ड्यूटी लगती है? A2: हां, रद्दीकरण विलेख पर भी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस लगती है।

Q3: अगर ग्रहीता मर गया हो तो क्या दान-पत्र रद्द हो सकता है? A3: ग्रहीता की मृत्यु के बाद दान-पत्र रद्द करना बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि उसके वारिसों (Heirs) का हक बन जाता है। इसके लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ता है।


संबंधित लेख:

सभी पारिवारिक बंटवारा लेखों के लिए: पारिवारिक संपत्ति बंटवारा और हस्तांतरण

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

Similar Posts

  • Family property partition mein dispute ho jaye toh solution

    अगर पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे में विवाद (Dispute) हो जाए, तो इसका समाधान सबसे पहले परिवार के बुज़ुर्गों या मध्यस्थों (Mediators) की मदद से आपसी समझौते से करने की कोशिश करें। अगर बात न बने, तो एक कानूनी नोटिस भेजें और फिर सिविल कोर्ट में ‘पार्टिशन सूट’ (Partition Suit) दायर करके कोर्ट के ज़रिए प्रॉपर्टी…

  • Ancestral property vs self-acquired property partition mein farak

    पैतृक (Ancestral) और स्व-अर्जित (Self-acquired) संपत्ति के बंटवारे में मुख्य फर्क यह है कि पैतृक संपत्ति में बच्चों का हक जन्म से बनता है और उसे बराबर बाँटा जाता है, जबकि स्व-अर्जित संपत्ति में मालिक के जीवित रहते बच्चों का कोई हक नहीं होता; मालिक अपनी मर्जी से उसे किसी को भी दे या बाँट…

  • Minor (nabalig) ke naam property partition kaise hoti hai

    नाबालिग (Minor) के नाम पर प्रॉपर्टी का बँटवारा (Partition) या ट्रांसफर हो सकता है। इसमें नाबालिग के कानूनी संरक्षक (Guardian – आमतौर पर माता-पिता) उसकी ओर से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करते हैं। हालांकि, नाबालिग के हिस्से को बेचने या गिरवी रखने के लिए ज़िला जज या कोर्ट की विशेष अनुमति (Court Permission) लेना अनिवार्य होता…

  • Gift deed mein daata aur grahita ke rights kya hote hain

    दान-पत्र (Gift Deed) में दाता (Donor) का अधिकार यह होता है कि वह प्रॉपर्टी को बिना किसी शर्त के दान कर सकता है, और एक बार दान देने के बाद उसका प्रॉपर्टी पर सारा मालिकाना हक खत्म हो जाता है। वहीं ग्रहीता (Donee) का अधिकार होता है कि वह उस प्रॉपर्टी का पूरा और स्वतंत्र…

  • Partition deed cancel karne ka legal process

    विभाजन विलेख (Partition Deed) को रद्द (Cancel) करने के लिए सभी सह-स्वामियों (Co-owners) की आपसी सहमति से एक ‘रद्दीकरण विलेख’ (Cancellation Deed) बनाकर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज कराना पड़ता है। अगर कोई एक भाई भी रद्द करने को तैयार नहीं है, तो उसे सिविल कोर्ट में केस करके ही रद्द करवाया जा सकता है। कभी-कभी…

  • Partition deed mein registration fee aur stamp duty

    विभाजन विलेख (Partition Deed) में रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी आमतौर पर सेल डीड (Sale Deed) की तुलना में कम लगती है। छत्तीसगढ़ में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी बँटवारे पर स्टांप ड्यूटी में छूट दी जाती है, जो अक्सर प्रॉपर्टी के मूल्य या हिस्से के एक निर्धारित प्रतिशत पर निर्भर करती है। बँटवारा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *