Property purchase mein “one year no transfer” clause ka matlab

प्रॉपर्टी पर्चेस (Purchase) में “One year no transfer” क्लॉज का मतलब है कि खरीददार (Buyer) द्वारा प्रॉपर्टी खरीदने या पॉसेशन लेने के 1 साल तक उसे किसी तीसरे व्यक्ति को आगे बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक है। यह क्लॉज आमतौर पर सरकारी आवास बोर्ड (जैसे CGHB) या कुछ बिल्डरों की शर्तों में होता है ताकि सट्टेबाज़ी (Flipping) रुक सके।

जब कोई व्यक्ति किसी सरकारी स्कीम या बिल्डर से प्रॉपर्टी खरीदता है, तो उसके सेल डीड (Sale Deed) में यह शर्त लिखी होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीददार असली उपयोगकर्ता है, न कि कोई सट्टेबाज़।

“One Year No Transfer” क्लॉज का कारण और असर

1. सट्टेबाज़ी (Flipping) रोकना: अगर यह क्लॉज न हो, तो लोग सस्ती प्रॉपर्टी खरीदकर कुछ ही महीनों में मार्केट रेट पर बेच देंगे। यह क्लॉज ब्लैक मार्केटिंग रोकता है। CGHB प्रॉपर्टी पर 1 साल तक ट्रांसफर न करने का नियम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

2. एग्रीमेंट और सेल डीड में अंतर: सेल एग्रीमेंट और सेल डीड में जो फर्क होता है, उसी के अनुसार यह क्लॉज अंतिम सेल डीड में दर्ज होता है। अगर आप 1 साल पहले ट्रांसफर करते हैं, तो रजिस्ट्रार आपकी रजिस्ट्री नहीं करेगा।

3. डिफ़ॉल्ट के नतीजे: अगर आप इस क्लॉज को तोड़कर प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश करते हैं, तो आपकी रजिस्ट्री रद्द हो सकती है या बोर्ड/बिल्डर आप पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

एक वास्तविक उदाहरण

भिलाई के एक व्यक्ति को CGHB स्कीम में फ्लैट मिला। उसने 6 महीने में ही उसे किसी और को बेचने का सौदा कर लिया। जब वे रजिस्ट्री के लिए गए, तो रजिस्ट्रार ने प्रॉपर्टी पर्चेस में “1 साल तक ट्रांसफर न करने” के क्लॉज का हवाला देकर रजिस्ट्री नहीं की। उन्हें 1 साल पूरा होने का इंतज़ार करना पड़ा।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: क्या 1 साल पहले प्रॉपर्टी अपने बेटे/पत्नी के नाम कर सकता हूँ? A1: आमतौर पर बिना बोर्ड की अनुमति के नहीं। इसके लिए भी आपको सेल डीड रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन से पहले विशेष छूट मांगनी पड़ती है।

Q2: क्या यह क्लॉज हर प्रॉपर्टी पर लागू होता है? A2: नहीं, सामान्य री-सेल (Resale) प्रॉपर्टी या बिल्डर की पूरी तरह तैयार प्रॉपर्टी पर यह क्लॉज नहीं होता। यह सिर्फ सरकारी या पहले आवंटन (Allotment) वाली प्रॉपर्टी पर होता है।

Q3: 1 साल की अवधि पॉसेशन से शुरू होती है या रजिस्ट्री से? A3: यह आमतौर पर आवंटन (Allotment) या पॉसेशन की तिथि से शुरू मानी जाती है।


संबंधित लेख:

सभी सेल डीड और प्रॉपर्टी खरीद लेखों के लिए: सेल डीड और प्रॉपर्टी खरीद

यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है, अंतिम निर्णय हेतु संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय/वकील से सलाह लें। अंतिम अपडेट: [July 2026]

Similar Posts

  • Sale deed registration ke baad mutation (naam antaran) kaise karayein

    सेल डीड (Sale Deed) की रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन (Mutation या नाम अंतरण) कराने के लिए आपको रजिस्टर्ड सेल डीड की कॉपी, पुराना खतियान, और अपने आधार कार्ड के साथ तहसील कार्यालय (या नगर निगम) में जाना होता है। वहां एक आवेदन देकर सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Record) में पुराने मालिक की जगह अपना नाम…

  • Builder ne sale deed mein galat information di — kya karein

    अगर बिल्डर ने सेल डीड (Sale Deed) में गलत जानकारी (Galat Information) दे दी है, तो आपको सबसे पहले बिल्डर को एक लिखित नोटिस देना चाहिए कि वह इसे सुधार (Correction) के लिए तैयार हो। अगर वह माने तो ‘सुधार विलेख’ (Correction Deed) बनाया जाता है। अगर बिल्डर मना करे, तो आप कंज्यूमर कोर्ट (Consumer…

  • Property registry ke time documents ki complete checklist

    प्रॉपर्टी रजिस्ट्री (Sale Deed Registration) के समय डाक्यूमेंट्स की चेकलिस्ट में मुख्य रूप से पुरानी सेल डीड (Original Title Deed), खतियान/पट्टा (Patta/Khatauni), नक्शा (Map), एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC), दोनों पार्टियों (Buyer/Seller) के पैन और आधार कार्ड, और पासपोर्ट साइज़ फोटो शामिल होते हैं। इन कागज़ों के बिना सब-रजिस्ट्रार प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं करेगा। प्रॉपर्टी खरीदते समय…

  • Registry expense buyer ya seller — kaun pay karta hai

    प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (Sale Deed Registration) का खर्च आमतौर पर खरीददार (Buyer/Vendee) देता है, जिसमें स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) और रजिस्ट्रेशन फीस शामिल होती है। हालांकि, प्रॉपर्टी को साफ़ कराने का खर्च (जैसे पुराना लोन चुकाना या NOC लेना) बिक्रेता (Seller/Vendor) को उठाना पड़ता है। प्रॉपर्टी का सौदा करते समय यह तय करना ज़रूरी है…

  • Sale deed mein stamp duty calculation kaise karein CG mein

    छत्तीसगढ़ में सेल डीड (Sale Deed) पर स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) का कैलकुलेशन प्रॉपर्टी के ‘सर्किल रेट’ (Circle Rate) या ‘एग्रीमेंट वैल्यू’ (Agreement Value), जो भी ज़्यादा हो, उसके आधार पर किया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार के नियमों के अनुसार, आमतौर पर पुरुष खरीददारों पर लगभग 5% से 7% और महिला खरीददारों पर कुछ प्रतिशत…

  • Buyer/seller default hone par compensation clause kaise likhein

    सेल एग्रीमेंट (Sale Agreement) में बायर (Buyer) या सेलर (Seller) के डिफ़ॉल्ट (Default) होने पर कॉम्पेंसेशन (Compensation) क्लॉज इस तरह लिखा जाता है: “अगर खरीददार बाकी पैसे नहीं देता, तो उसका टोकन जब्त (Forfeit) हो जाएगा। अगर बिक्रेता प्रॉपर्टी ट्रांसफर नहीं करता, तो वह टोकन के अलावा उतनी ही राशि जुर्माने के रूप में देगा।”…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *