Sale Deed

  • Sale deed registration fail ho jaye toh kya options hain

    अगर सेल डीड (Sale Deed) की रजिस्ट्री फेल (Fail) हो जाए या रजिस्ट्रार उसे अस्वीकार (Refuse) कर दे, तो आपके पास विकल्प (Options) यह हैं कि आप पहले रजिस्ट्रार द्वारा बताई गई खामी (Defect) को ठीक करें। अगर रजिस्ट्रार अनुचित रूप से इनकार कर रहा है, तो आप उपायुक्त (Deputy Commissioner) या डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार को…

  • Second-hand property purchase mein extra precautions

    सेकंड-हैंड (Second-hand या री-सेल) प्रॉपर्टी खरीदते समय एक्स्ट्रा सावधानी (Extra Precautions) के रूप में आपको पिछले 30 सालों का टाइटल चेन (Title Chain), प्रॉपर्टी पर कोई कर्ज़ (Encumbrance) तो नहीं, सोसाइटी/बिल्डर का बकाया (Dues), और अनधिकृत निर्माण (Unauthorized Construction) की जांच करनी चाहिए। नई प्रॉपर्टी की तुलना में पुरानी या री-सेल प्रॉपर्टी खरीदने में ज़्यादा…

  • Sale deed mein stamp duty calculation kaise karein CG mein

    छत्तीसगढ़ में सेल डीड (Sale Deed) पर स्टांप ड्यूटी (Stamp Duty) का कैलकुलेशन प्रॉपर्टी के ‘सर्किल रेट’ (Circle Rate) या ‘एग्रीमेंट वैल्यू’ (Agreement Value), जो भी ज़्यादा हो, उसके आधार पर किया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार के नियमों के अनुसार, आमतौर पर पुरुष खरीददारों पर लगभग 5% से 7% और महिला खरीददारों पर कुछ प्रतिशत…

  • Property registry ke time documents ki complete checklist

    प्रॉपर्टी रजिस्ट्री (Sale Deed Registration) के समय डाक्यूमेंट्स की चेकलिस्ट में मुख्य रूप से पुरानी सेल डीड (Original Title Deed), खतियान/पट्टा (Patta/Khatauni), नक्शा (Map), एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC), दोनों पार्टियों (Buyer/Seller) के पैन और आधार कार्ड, और पासपोर्ट साइज़ फोटो शामिल होते हैं। इन कागज़ों के बिना सब-रजिस्ट्रार प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं करेगा। प्रॉपर्टी खरीदते समय…

  • Sale deed vs Agreement to Sell — legal difference

    सेल डीड (Sale Deed) और एग्रीमेंट टू सेल (Agreement to Sell) का कानूनी फर्क यह है कि एग्रीमेंट टू सेल सिर्फ प्रॉपर्टी बेचने का एक वादा है जिसमें मालिकाना हक (Ownership) ट्रांसफर नहीं होता, जबकि सेल डीड अंतिम दस्तावेज़ है जिसके रजिस्ट्री होते ही प्रॉपर्टी का मालिकाना हक हमेशा के लिए खरीददार के नाम हो…

  • Flat purchase ke baad society/association banna kyun zaroori hai

    फ्लैट खरीदने के बाद सोसाइटी/एसोसिएशन (Society/Association) बनाना इसलिए ज़रूरी है ताकि बिल्डिंग के कॉमन एरिया (Common Area) का रखरखाव, सुरक्षा, और बिल्डर से प्रॉपर्टी का पूरा नियंत्रण हस्तांतरित करवाया जा सके। बिना सोसाइटी के फ्लैट मालिकों को बिल्डर पर निर्भर रहना पड़ता है और कानूनी रूप से बिल्डिंग के मामलों में एकजुट होकर आवाज़ उठाने…

  • Property purchase mein “one year no transfer” clause ka matlab

    प्रॉपर्टी पर्चेस (Purchase) में “One year no transfer” क्लॉज का मतलब है कि खरीददार (Buyer) द्वारा प्रॉपर्टी खरीदने या पॉसेशन लेने के 1 साल तक उसे किसी तीसरे व्यक्ति को आगे बेचने या ट्रांसफर करने पर रोक है। यह क्लॉज आमतौर पर सरकारी आवास बोर्ड (जैसे CGHB) या कुछ बिल्डरों की शर्तों में होता है…

  • Builder ne sale deed mein galat information di — kya karein

    अगर बिल्डर ने सेल डीड (Sale Deed) में गलत जानकारी (Galat Information) दे दी है, तो आपको सबसे पहले बिल्डर को एक लिखित नोटिस देना चाहिए कि वह इसे सुधार (Correction) के लिए तैयार हो। अगर वह माने तो ‘सुधार विलेख’ (Correction Deed) बनाया जाता है। अगर बिल्डर मना करे, तो आप कंज्यूमर कोर्ट (Consumer…

  • Sale deed registration ke baad mutation (naam antaran) kaise karayein

    सेल डीड (Sale Deed) की रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन (Mutation या नाम अंतरण) कराने के लिए आपको रजिस्टर्ड सेल डीड की कॉपी, पुराना खतियान, और अपने आधार कार्ड के साथ तहसील कार्यालय (या नगर निगम) में जाना होता है। वहां एक आवेदन देकर सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Record) में पुराने मालिक की जगह अपना नाम…

  • Property purchase mein title verification kaise karein khud se

    प्रॉपर्टी खरीदते समय टाइटल वेरिफिकेशन (Title Verification) खुद करने के लिए आपको पिछले 30 सालों का रिकॉर्ड (30-year chain) जांचना चाहिए। इसके लिए आपको मूल सेल डीड, खतियान (Patta), एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC), और राजस्व रिकॉर्ड (Khasra) निकालकर देखना होगा कि प्रॉपर्टी किस-किस के नाम से होती हुई अब तक आई है और कोई विवाद तो…